Friday, December 2, 2022

हरियाणा में ट्रक मकैनिक के बेटे ने रोशन किया नाम. जैवलिन थ्रो में जीत कर दिखाया मेडल

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पानीपत : कहते हैं कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती. प्रतिभा अमीरी गरीबी के बीच का फासला नहीं देखती. यह लोग एक ना एक दिन अपना और अपने परिवार का नाम जरूर रोशन करते हैं. आज हम आपको ऐसे ही एक होनहार युवक से मिलाने जा रहे हैं. जिसने घोर गरीबी के बावजूद अपनी प्रतिभा के दम पर खुद को साबित कर दिखाया है.हरियाणा के पानीपत जिले के रहने वाले इस युवक ने हरियाणा स्‍टेट चैंपियनशिप में आयोजित जैवलिन थ्रो में मेडल जीतकर दिखाया है।

ट्रक मैकेनिक है सागर के पिता

पानीपत के झट्टीपुर गांव के ट्रक मैकेनिक के बेटे सागर रुहल ने 35 वीं जूनियर हरियाणा स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अंडर-16 में जैवलिन थ्रो में रजत पदक जीता है । यह प्रतियोगिता रोहतक के राजीव गांधी खेल स्टेडियम में आयोजित हुई थी.

नेशनल चैंपियनशिप के लिए हुआ चयन

इस प्रदर्शन के बाद सागर का चयन जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए हो गया है। इससे पहले सागर द्वारा प्रथम नीरज चोपड़ा प्रदेश स्तरीय जैवलिन थ्रो कंपटीशन में गोल्ड मेडल जीता जा चुका है.सागर के पिता सुरेंद्र रुहल ट्रक मैकेनिक हैं और मां सुमन गृहणी है। सागर की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.हरियाणा एथलेटिक्स के महासचिव राजकुमार मिटान ने भी सागर को बधाई दी है ।

विक्रांत मलिक को देखकर बना खिलाड़ी

सागर ने मीडिया को बताया कि 2 साल पहले वह रोहतक में आयोजित जैवलिन थ्रो की प्रतियोगिता देखने गया था. वहां उसने विक्रांत मलिक को जैवलिन थ्रो करते हुए देखा और उससे प्रेरित होकर ही उसने भी जैवलिन थ्रो खेलने का निर्णय लिया. तभी से वह लगातार जैवलिन थ्रो की प्रैक्टिस कर रहा है. सागर ने बताया कि उसने जिला जैवलिन थ्रो कंपटीशन में पहला मेडल जीता था तभी से उसका हौसला बढ़ गया.

1.33:लाख रुपए का मंगाया जैवलिन

फिलहाल वे गुवाहाटी में होने वाली नेशनल जैवलिन प्रतियोगिता की तैयारियों में जुटा है इसके लिए उसने विशेष तौर पर 1.33 लाख रुपे का जैवलिन मंगाया है. वह सुबह और शाम लगातार प्रैक्टिस कर रहा है ताकि 60 मीटर जैवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीतकर अपने देश और प्रदेश का नाम रोशन कर सकें. सागर ने बताया कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है इसके बावजूद उसके पिता और परिवार के बाकी लोग उसकी पूरी मदद करते हैं. उसके कोच विक्रांत मलिक भी उसकी मदद करने से पीछे नहीं रहते. वहीं सागर के कोच विक्रांत मलिक का कहना है कि सागर कि खेल में सुधार लाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है. उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस नेशनल गेम्स में सागर अपने देश के लिए गोल्ड मेडल जरूर लाएगा.

 

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